The Impact of Mercury in Fifth House - Lal Kitab 1941 | Astrologer Vijay Goel
लाल किताब 1941 की विवेचन शृंखला का ये मेरा पेंसठवां वीडियो है। इसमे मैंने “बुध खाना नंबर 5” (जब कुंडली के पांचवे घर मे बुध स्थित हो) के बारे मे विश्लेषण करने का प्रयास किया है। लाल किताब में पांचवां घर शुभाशुभ भाव कहलाता है। यह मिश्रित फल देने वाला होता है जीवन में मिलने वाली सफलता या असफलता सभी का विचार इस भाव से किया जाता है। संतान और संतान से संबंधी अच्छी-बुरी सभी बातों का विचार किया जाता है। पांचवें घर में बैठा हुआ ग्रह नवें घर को देखता है। इस कारण से यदि नौवां घर खराब हो रखा हो तो इसका फल मंदा होता है। गुरू टेवे में जब तक उमदा औलाद दुखी न होती हो पांच पापी गुरू मंदा टेवे बिजली चमका आ देती है। खाना नम्बर 5 का कारक ग्रह बृहस्पति को माना गया है। अगर कुण्डली में बृहस्पति शुभ हो तो संतान को भी शुभ फल प्राप्त होने स्वभाविक होते हैं। यदि पांचवां घर पाप ग्रह से त्रस्त हो और गुरू की स्थिति भी शुभ न हो तो उक्त स्थिति में संतान पर प्रभाव अवश्य पडे़गा। अगर टेवे में चंद्रमा मजबूत स्थिति में हो तो प्रभाव में शुभता दिखाई देगी। यदि पाँचवें खाने में बुध है तो फकीर की आवाज या आशीर्वाद फलित होने वाला माना गया है। ऐसे व्यक्ति के मुँह से निकला वाक्य उत्तम फल देने वाला सिद्ध होगा। भाग्यशाली, विनोदी स्वभाव, प्रसन्न रहने वाला। जीवन आनंदमय व्यतीत होगा। ये विवेचना लाल किताब ज्योतिषियों के अलावा, भृगु नंदी नाड़ी ज्योतिषियों और वैदिक (पाराशर) ज्योतिषियों के लिए भी उपयोगी हो सकती है। वीडियो के बारें मे अपनी प्रतिक्रिया से अवगत अवश्य कराएं। लाल किताब 1941 का विस्तृत वॉल्यूम PDF फॉर्मेट मे प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप्प (+918003004666) पर संपर्क करें। http://www.vijaygoel.net/ #mercuryInFourthHouse #LalKitab #LalKitabAstrology #mercury #बुध #Budh #LalKitabAstrologer #LalKitab1941 #LalKitabJyotish #VijayGoel #AstrologerVijayGoel #As









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