Impact of Ketu in the Seventh House - Lal Kitab 1941 Analysis by Astrologer Vijay Goel
लाल किताब 1941 की विवेचन शृंखला का ये मेरा एकसौतीनवां वीडियो है। इसमे मैंने “केतु खाना नंबर 7” (जब कुंडली के सातवे घर मे केतु स्थित हो) के बारे मे विश्लेषण करने का प्रयास किया है। जन्मकुंडली में सप्तम स्थान से विवाह का विचार किया जाता है| यह भाव निजी जीवन से संबंध रखता है। विवाह और पत्नी के अलावा ये घर ससुराल, प्रेम, भागीदारी और गुप्त व्यापार के लिये भी देखा जाता है। यहां स्थित केतू को केवल आर्थिक मामलों के लिए कुछ हद तक अच्छा माना गया है। अत: आपको धन का उत्तम सुख मिल सकता है, और लौटा हुआ धन स्थिर रहेगा। लेकिन अधिकांश मामलों में यहां स्थित केतू को अशुभफल दाता कहा गया है। कहा गया है कि यहां स्थि केतू जातक को मतिमंद और मूर्ख बनाता है। जातक अच्छे को बुरा और बुरे को अच्छा समझता है। जातक स्वयं के चरित्र को ध्यान में न रखकर दूसरों के चरित्र पर संदेह करता है। यहां स्थित केतू आपका अपमान करा सकता है। वैवाहिक सुख कम मिलता है। दुष्टों की संगति मिलती है। मित्रों से भी कष्ट मिलता है। यात्राएं कष्टकारी या असफल हो जाती हैं। आपको मार्ग संबंधी चिंताएं रहेंगी। आपका धन अधिक खर्च होगा। कई मामलों में आपका धन बेकार में नष्ट हो जाएगा। आपको आर्थिक चिंता रह सकती है। पिता के द्वारा संचित धन जल्दी नष्ट हो जाता है। शत्रुओं का भय रहता है और शत्रुओं के द्वारा धन हानि भी होती है। सरकार से भी भय बना रहता है। वात रोग, अंतडियों के रोग और वीर्य संबंधी रोग हो सकते हैं। आपको जल के माध्यम से भी भय बना रहेगा। ये विवेचना लाल किताब ज्योतिषियों के अलावा, भृगु नंदी नाड़ी ज्योतिषियों और वैदिक (पाराशर) ज्योतिषियों के लिए भी उपयोगी हो सकती है। वीडियो के बारें मे अपनी प्रतिक्रिया से अवगत अवश्य कराएं। लाल किताब 1941 का विस्तृत वॉल्यूम PDF फ









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