Exploring the Impact of Mars in Eighth House - Lal Kitab (लाल किताब) 1941 EP56 - Astrologer Vijay Goel
लाल किताब 1941 की विवेचन शृंखला का ये मेरा छप्पनवाँ वीडियो है। इसमे मैंने “मंगल खाना नंबर 8 (जब कुंडली के आठवें घर मे मंगल स्थित हो) के बारे मे विश्लेषण करने का प्रयास किया है। अष्टम भाव आयु भाव है इस भाव को त्रिक भाव, पणफर भाव और बाधक भाव के नाम से जाना जाता है। आयु का निर्धारण करने के लिए इस भाव को विशेष महत्ता दी जाती है। इस भाव से जिन विषयों का विचार किया जाता है, उन विषयों में व्यक्ति को मिलने वाला अपमान, पदच्युति, शोक, ऋण, मृत्यु और इसके कारण है। इस भाव से व्यक्ति के जीवन में आने वाली रुकावटें देखी जाती है। आयु भाव होने के कारण इस भाव से व्यक्ति के दीर्घायु और अल्पायु का विचार किया जाता है। अष्टमेश अचानक आने वाले प्रभाव दिखाता है। यह भाव जीवन में आने वाली रूकावटों से रूबरू कराता है। जहां - जहां अष्टमेश का प्रभाव पड़ता है उससे संबंधित अवरोध जीवन में दिखाई पड़ते हैं। अष्टमेश जिस भाव में स्थित होता है उस भाव के फल अचानक दिखाई देते हैं और वह अचानक से मिलने वाले फलों को प्रदान करता है। इस घर का मंगल पति या पत्नी की मृत्यु को प्रदर्शित करता है। जातक का एक से अधिक महिलाओं के साथ संबंध बनेगा। जातक को बवासीर की बीमारी होगी। वैवाहिक जीवन से खुशियां दूर रहेगी। जातक अपने सभी काम हुक्म देकर कराने वाला होगा। आठवें भाव में बैठे मंगल के अशुभ प्रभाव से जातक अल्प आयु वाला तथा दरिद्र होता है। जातक के लिए 28 वर्षों तक मौत का फंदा बना रहता है। मंगल आठवें भाव में हो और बुध छठे भाव में हो तो जातक की माता की मृत्यु जातक के बचपन में हो जाने की आशंका रहती है। जातक 'मर्डर केस' में फंस सकता है। जातक रोगी होता है। ये विवेचना लाल किताब ज्योतिषियों के अलावा, भृगु नंदी नाड़ी ज्योतिषियों और वैदिक (पाराशर) ज्योतिषियों के लिए









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