Exploring the Influence of Moon in the Fourth House - Lal Kitab 1941 - EP28 - Astrologer Vijay Goel
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लाल किताब 1941 की विवेचन शृंखला का ये मेरा अट्ठाइसवाँ वीडियो है। इसमे मैंने “चंद्रमा खाना नंबर 4” (जब कुंडली के चौथे घर मे चंद्रमा स्थित हो) के बारे मे विश्लेषण करने का प्रयास किया है।
कुंडली का चौथा घर व्यक्ति के ज़ीवन में मिलने वाले सुख, खुशियों, सुविधाओं, तथा उसके घर के अंदर के वातावरण अर्थात घर के अन्य सदस्यों के साथ उसके संबंधों को भी दर्शाता है। किसी व्यक्ति के जीवन में वाहन-सुख, नौकरों-चाकरों का सुख, उसके अपने मकान बनने या खरीदने जैसे भावों को भी कुंडली के इस घर से देखा जाता है। किसी व्यक्ति की जमीन-जायदाद के बारे में बताने के लिए तथा जमीन-जायदादों से संबंधित व्यवसायों में उसे होने वाले लाभ या हानि के बारे में जानने के लिए भी कुंडली के इस घर को देखा जाता है।
चौथे भाव में स्थित चंद्रमा पर केवल चंद्रमा का ही पूर्णरूपेण प्रभाव होता है क्योंकि वह चौथे भाव और चौथी राशि दोनो का स्वामी होता है। यहां चन्द्रमा हर प्रकार से बहुत मजबूत और शक्तिशाली हो जाता है। चंद्रमा से संबन्धित वस्तुएं जातक के लिए बहुत फायदेमंद साबित होती हैं। चौथे भाव में चन्द्र के विशेष शुभ फल प्राप्त होते है। जातक को माँ की संपत्ति प्राप्त होती है, जातक का पिता से ज्यादा माँ के साथ लगाव होता है। जातक अपने परिश्रम से धन अर्जित करता है। चौथे भाव में चन्द्र, जातक को एक भव्य निवास स्थान देता है। जातक की आजीविका विवाह से पहले अस्थिर रहती है परन्तु विवाह के उपरान्त जातक का भाग्योदय होता है। जातक प्रतिष्ठित और सम्मानित व्यक्ति होने के साथ-साथ नरम दिल और सभी प्रकार से धनी होगा।
ये विवेचना लाल किताब ज्योतिषियों के अलावा, भृगु नंदी नाड़ी ज्योतिषियों और वैदिक (पाराशर) ज्योतिषियों के लिए भी उपयोगी हो सकती है
6 years ago