The Impact of Ketu in the Fifth House - Lal Kitab 1941 EP101 with Astrologer Vijay Goel
लाल किताब 1941 की विवेचन शृंखला का ये मेरा एकसौएकवां वीडियो है। इसमे मैंने “केतु खाना नंबर 5” (जब कुंडली के पांचवे घर मे केतु स्थित हो) के बारे मे विश्लेषण करने का प्रयास किया है। कुंडली में पांचवा घर रचनात्मकता, रोमांस और बच्चों से जुड़ा हुआ बताया गया है। यह सब खुशी के बारे में है जो आपको अच्छा महसूस कराता है और आनंद अक्सर रचनात्मक कृत्यों का एक परिणाम होता है जिसमें आप लिप्त हैं। इसे भाग्य का घर भी माना जाता है। तो, पंचम भाव में ग्रहों को देखने से पता चलेगा कि लॉटरी के अवसर यह आपका कितना साथ देगा। आप विजयी होंगे या आपका सब कुछ लुट जाएगा। केतू के पंचम में स्थित होने के कारण आप बलवान होंगे। यहां स्थित केतू आपके संतानो की संख्या को कम करता है अत: आपके पुत्र कम और कन्याएं अधिक होंगी। आपकी संतानों को आपके बांधवों से अधिक लगाव होगा। गाएं आदि पशुओं का लाभ होगा अर्थात आपको पशु धन की प्राप्ति पर्याप्त मात्रा में होगी। आपको तीर्थयात्रा करना या विदेश में रहना अधिक पसंद होगा। आप अधिक पराक्रमी होने के बावजूद भी दूसरों की नौकरी करना पसंद करेंगे। हांलाकि आपके पास भी नौकर चाकर होंगे। कुछ छल-कपट करके भी आप लाभ कमा सकते हैं। आपके भाई बंधु सुखी रहते हैं। आपके द्वारा दिए गए उपदेश लोगों पर खूब प्रभाव डालते हैं। आप विदेश जाने के इच्छुक रहेंगे। लेकिन यहां स्थित केतू कई प्रकार के अशुभ फल भी देता है। अत: आपमें धर्य की कमी देखने को मिल सकती है। आपके दिलो-दिमाग में नकारात्मक विचारों का बाहुल्य हो सकता है। आपको अपने ही गलत निर्णयों के लिए पश्चाताप करना पड सकता है। आपको अपने ही भ्रमात्मक ज्ञान और गलती के कारण शारीरिक कष्ट मिल सकता है। सगे भाइयों से विवाद हो सकता है। तंत्र-मंत्र के माध्यम से कष्ट मिल सकता है। पुत









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